रायपुर, 11 मार्च 2026 — पारंपरिक कौशल और स्थानीय संसाधनों के उपयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन – बिहान योजना के तहत छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।
जिले के कांसाबेल विकासखंड के ग्राम सेम्हर कछार में हरियाली स्व-सहायता समूह की 11 महिलाओं ने पारंपरिक संसाधन छिंद कासा से आकर्षक टोकरी और अन्य हस्तशिल्प उत्पाद तैयार कर अपनी आजीविका को मजबूत किया है।
बिहान योजना से मिला स्वरोजगार का अवसर
समूह की सदस्य बालमुनि भगत बताती हैं कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन – बिहान योजना से जुड़ने के बाद महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर मिला। पहले वे केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, लेकिन अब वे अपने हुनर से अच्छी आय अर्जित कर रही हैं।
उनके अनुसार यह कार्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ा रहा है।
महिलाओं का कहना है कि छिंद कासा से बनने वाले हस्तशिल्प उत्पाद न केवल एक व्यवसाय हैं, बल्कि यह स्थानीय परंपरा, कौशल और सांस्कृतिक विरासत को भी एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम हैं।
हाट-बाजार और मेलों में बढ़ी मांग
समूह की महिलाओं को बिहान योजना के माध्यम से प्रशिक्षण, सहयोग और विपणन की सुविधा मिली है। इसके चलते उनके उत्पाद अब स्थानीय हाट-बाजार और मेलों में लोकप्रिय हो रहे हैं।
महिलाएं कहती हैं कि अब वे केवल घर तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि समाज में अपनी अलग पहचान बना रही हैं।
सरकारी योजनाओं से बढ़ा आत्मविश्वास
समूह की दीदियों ने विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं के कारण वे आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं।
उनके अनुसार हस्तशिल्प उत्पाद आज महिलाओं के लिए आय का महत्वपूर्ण साधन बन गया है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहा है।
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