सरकार ने इस वर्ष को महतारी गौरव वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में प्रदेश की लखपति दीदीयों को, सफल महिला उद्यमियों की कार्य प्रणाली तथा उनके सफल व्यवसाय मॉडल का अध्ययन करने हेतु देश के अंदर आर्थिक एवं वाणिज्यिक क्षेत्रों के Exposure Visit के लिए लखपति दीदी भ्रमण योजना में 5 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है।
इसके अतिरिक्त लखपति दीदी बहनों को प्रदेश के शक्ति पीठों के दर्शन की भी व्यवस्था की जाएगी।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण हेतु सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों में निरंतरता रखते हुए इस बजट में महिलाओं के नाम पर भूमि, भवन, अचल सम्पत्ति क्रय पर भारित पंजीयन शुल्क में 50% की छूट दी जाएगी।
लखपति दीदी योजना
लखपति दीदी स्वयं सहायता समूह की एक ऐसी सदस्या है, जिसकी सालाना पारिवारिक आय एक लाख रुपये (रु. 1,00,000) या इससे अधिक है। इस आय की गणना कम से कम चार कृषि मौसमों या चार व्यापार चक्रों के लिए की जाती है, जिनकी औसत मासिक आय दस हजार रुपये (रु.10,000) से अधिक है, जोकि लगातार बनी रहे।
लखपति दीदी अपनी आय के लिए ही नहीं, बल्कि स्थायी आजीविका कार्यप्रणाली (खेत, गैर-कृषि, सेवा) को अपनाने और संसाधनों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करके जीवन का योग्य स्तर प्राप्त करने के माध्यम से, समुदाय के लिए एक प्रेरणा के रूप में अपनी परिवर्तन यात्रा के लिए कार्य करती हैं।
एस.एच.जी. समूहों ने सामूहिक कार्रवाई और आपसी सहयोग को बढावा देने के साथ महत्वपूर्ण वित्तीय साक्षरता, कौशल विकास, और आजीविका सहायता के लिए माध्यम के रूप में योगदान किया है। विशेष रूप से, अब ध्यान केवल सामाजिक और वित्तीय समावेशन से आगे बढ़कर, एस.एच.जी. सदस्यों को उद्यमशीलता और आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बनाने का है। उनके स्वाभावी कौशल और क्षमताएं उन्हें उच्च आय वर्ग की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। सरकार अब सक्रिय रूप से इस परिवर्तन और लखपति दीदी जैसी पहल का समर्थन कर रही है।
लखपति पहल सभी सरकारी विभागों/मंत्रालयों, निजी क्षेत्र और बाजार के अनुभवियों के बीच अभिसरण सुनिश्चित करके विविध आजीविका गतिविधियों की सुविधा प्रदान करती है। इस रणनीति में सभी स्तरों पर केंद्रित योजना, कार्यान्वयन और निगरानी शामिल है।
